कानूनी
चुनाव खर्च का डिजिटल हिसाब
हर खर्च का रिकॉर्ड मोबाइल पर कैसे रखें — रजिस्टर, रसीद और सीमा के नियम।

चुनाव में हार से बड़ी मुसीबत है खर्च के हिसाब में गड़बड़ी — नोटिस तक की नौबत आ सकती है। समाधान है रोज का डिजिटल हिसाब।
नियम: (1) नामांकन से मतदान तक हर खर्च का रिकॉर्ड अनिवार्य — चाय-पानी से लेकर गाड़ी-डीजल तक। (2) अपने क्षेत्र की खर्च सीमा पहले दिन पता करें। (3) बड़ा भुगतान बैंक से, हर भुगतान की रसीद लें।
रोज की आदत: (4) शाम को 10 मिनट — दिन का खर्च लिखें: तारीख, मद, राशि, रसीद नंबर। (5) हर रसीद की फोटो। (6) प्रचार सामग्री का स्टॉक रखें। (7) गाड़ी लॉगबुक: कितने किमी, कितना ईंधन।
फायदा दोहरा है: कानूनी सुरक्षा भी, और मतदाता के सामने "पाई-पाई का हिसाब" कहने का नैतिक बल भी।
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